भारतीय संविधान की निर्माण प्रक्रिया एक परिचयात्मक अध्ययन

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जैसा कि हमने अपने पिछले ब्लॉग में पहले ही कहा था कि यह विषय आईएएस, पीसीएस और कई अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए एक महत्वपूर्ण विषय है, जिस पर हम यहां भी चर्चा करने जा रहे हैं। इस ब्लॉग में हम भारतीय संविधान की निर्माण प्रक्रिया पर चर्चा करेंगे प्रत्येक प्रश्न पत्र में कुछ प्रश्न भारतीय संविधान की निर्माण प्रक्रिया के विषय पर आधारित होते हैं। तो इस श्रेणी में हम प्रत्येक विषय को विस्तार से समझेंगे और इसे आसान और समझने योग्य बनाने का प्रयास करेंगे। कृपया ब्लॉग के साथ बने रहें और टिप्पणी करते रहें।

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जैसा कि हमने अपने पहले के ब्लॉग में पहले ही उल्लेख किया है कि भारतीय राज्यव्यवस्था व राजतन्त्र प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने के लिए भारतीय भूगोल, भारतीय इतिहास, भारतीय अर्थशास्त्र जैसे सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक है। जैसा कि पाठक जानते हैं कि हमने भारतीय इतिहास और भारतीय भूगोल पर ब्लॉग लिखना शुरू कर दिया है। भारतीय राज्यव्यवस्था की श्रेणी पर इस श्रृंखला में हमारे पहले ब्लॉग की निरंतरता में यह हमारा तीसरा ब्लॉग है। हम इसे आसान बनाने की कोशिश करेंगे, इसलिए ब्लॉग और समर्थन के लिए बने रहें।

भारतीय संविधान की निर्माण प्रक्रिया

भारत का संविधान 1946 के कैबिनेट मिशन योजना (Cabinet Mission Plan of 1946) के तहत स्थापित एक संविधान सभा (Constituent Assembly) द्वारा तैयार किया गया था।

संविधान सभा में सदस्यों की संख्या

संविधान सभा (Constituent Assembly) में सदस्यों की संख्या कुछ इस प्रकार की थी, संविधान सभा (Constituent Assembly) में कुल 389 सदस्य शामिल थे।जिसमें से 292 सदस्य प्रांतों (provinces) को, 93 सदस्य राज्यों (states) को, 03 सदस्य मुख्य आयुक्त प्रांतों (Chief Commissioner Provinces) और 01 सदस्य बलूचिस्तान (Baluchistan) का प्रतिनिधित्व करने वाले थे, लेकिन देश के विभाजन के बाद और मुस्लिम लीग के सदस्यों की वापसी के बाद संविधान सभा (Constituent Assembly) में सदस्यों की संख्या 389 से घट कर 299 हो गई थी जिनमे 229 सदस्य प्रांतों (provinces) और 70 सदस्य राज्यों (states) का प्रतिनिधित्व कर रहे थे।

संविधान सभा की पहली बैठक

संविधान सभा (Constituent Assembly) ने 9 दिसंबर, 1946 को अपनी पहली बैठक आयोजित की थी, अपनी पहली बैठक में डॉ सच्चिदानंद सिन्हा, जो की संविधान सभा (Constituent Assembly) के सबसे पुराने सदस्य थे उनको संविधान सभा (Constituent Assembly) का अनंतिम अध्यक्ष के रूप में चुना गया और 11 दिसंबर 1946 की बैठक में संविधान सभा (Constituent Assembly) ने डॉ राजेंद्र प्रसाद को अपना स्थायी अध्यक्ष चुन लिया ।

मसौदा समिति (Drafting Committee) का गठन

संविधान सभा ने संविधान बनाने के लिए 13 समितियों का गठन किया गया और इन समितियों की रिपोर्ट के आधार पर डॉ.बी.आर. अम्बेडकर की अध्यक्षता में एक सात सदस्यीय मसौदा समिति (Drafting Committee) का गठन किया गया और इस मसौदा समिति (Drafting Committee) को संविधान का एक प्रारूप तैयार करने का काम दिया गया था।

मसौदा समिति ने संविधान का मसौदा कब प्रकाशित किया ?

इस मसौदा समिति (Drafting Committee) ने संविधान का मसौदा (Draft) जनवरी 1948 को प्रकाशित कर दिया था। अब समय था इस प्रकाशित मसौदे (Draft) पर चर्चा करने की और संविधान सभा के सदस्यों को मसौदे पर चर्चा करने और संशोधनों का प्रस्ताव करने के लिए आठ महीने का समय दिया गया था।

संविधान सभा को संविधान को पूरा करने में लगभग कितना समय लगा ?

संविधान सभा के सदस्यों द्वारा मसौदे पर चर्चा के बाद और प्राप्त सुझावों पर तर्क-वितर्क करने के बाद अंततः मसौदे को 26 नवंबर, 1949 को सर्वसम्मति से अपनाया गया, और संविधान सभा के अध्यक्ष के द्वारा हस्ताक्षर भी कर दिया गया। संविधान सभा को इस कार्य को पूरा करने में लगभग 2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिन लगे।

नव निर्मित संविधान के को से प्रावधानो को तत्काल प्रभाव से लागू किया गया ?

नव निर्मित संविधान में दिए गए प्रावधानो जो की देश की नागरिकता, चुनाव, अनंतिम संसद और अस्थायी और आपातकालीन प्रावधानों से संबंधित थे उन्हें तत्काल प्रभाव से लागू अर्थात 26 नवंबर, 1949 कर दिया गया था लेकिन नव निर्मित संविधान का प्रमुख हिस्सा 26 जनवरी, 1950 को लागू किया गया ।

क्या भारतीय संविधान एक मूल दस्तावेज है ?

नहीं, भारतीय संविधान एक मूल दस्तावेज नहीं है बल्कि संविधान निर्माताओं ने स्वतंत्र रूप से संसार के अन्य संविधानों का भली प्रकार से अध्यन किया और उन संविधानों की अच्छी विशेषताओं को उधार लेकर उन विशेषताओं को अपनाते हुए, उन्होंने भारतीय परिस्थितियों में इसकी उपयुक्तता के लिए आवश्यक संशोधन भी किए और उनके दोषों को दूर किया।

भारतीय संविधान पर गहरा प्रभाव डालने वाले संसार के कौन से संविधान रहे ?

भारतीय संविधान की रचना से पहले संविधान निर्माताओं ने स्वतंत्र रूप से संसार के अन्य संविधानों का भली प्रकार से अध्यन किया और यूके, यूएसए, आयरलैंड, कनाडा आदि देशों के संविधान का प्रभाव भारतीय संविधान पर गहरा पड़ा है ऐसा मान सकते है ।

भारतीय संविधान में क्या और किस देश के संविधानों से लिया गया ?

ब्रिटिश संविधान से – सरकार की संसदीय प्रणाली, संविधान के नियमों का कार्यान्वयन, कानून बनाने की प्रक्रिया और एकल नागरिकता उधार ली गई । अमेरिकी संविधान से – न्यायपालिका की स्वतंत्रता, न्यायिक समीक्षा, मौलिक अधिकार, और सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों को हटाने के दिशा-निर्देश अपनाए गए । कनाडा के संविधान से – एक मजबूत केंद्रीय सशक्तिकरण के साथ संघीय प्रणाली को अपनाया गया । आयरलैंड गणराज्य के संविधान से – राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों (Directive Principles of State Policy) को लिया गया । ऑस्ट्रेलियाई संविधान से – समवर्ती सूची (Concurrent List) का विचार लिया गया । वीमर संविधान (Weimar Constitution) से – आपातकाल से संबंधित प्रावधानो को शामिल किया गया। यहां प्रश्न उठता है की वीमर संविधान (Weimar Constitution) क्या है ? जर्मन रीच का संविधान (जर्मन डाय वर्फसुंग डेस ड्यूशें रीच्स), जिसे आमतौर पर वीमर संविधान के रूप में जाना जाता है, वह संविधान था जिसने वीमर गणराज्य युग (1919-1933) के दौरान जर्मनी को शासित किया था। भारत सरकार अधिनियम, 1935 ने भारतीय संविधान पर बहुत प्रभाव डाला। इस अधिनियम से संघीय योजना, राज्यपाल का पद, संघीय न्यायपालिका की शक्तियाँ आदि लिए गए। संक्षेप में यह कह सकते है की भारतीय संविधान में कई मौजूदा संविधानों की सर्वोत्तम विशेषताओं को शामिल किया गया है।

आपके समर्थन के लिए धन्यवाद, कृपया टिप्पणी करते रहें।

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