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क्या किसी विदेशी नागरिक को भारत रत्न पुरस्कार मिल सकता है?
यह एक बड़ा सवाल है कि क्या भारत रत्न किसी विदेशी नागरिक को दिया जाता है क्योंकि इसके नाम से ही ऐसा लगता है कि यह भारतीय नागरिकों का ही है और आमतौर पर देखा गया है कि यह पुरस्कार भारत में जन्मे नागरिकों को ही दिया जाता है। लेकिन यह सच नहीं है, कुल 53 प्राप्तकर्ताओं में से 3 विदेशी नागरिक हैं क्योंकि ऐसा कोई औपचारिक प्रावधान नहीं है कि भारत रत्न प्राप्तकर्ता केवल भारतीय नागरिक हों।
परिणामस्वरूप मदर टेरेसा वर्ष 1980 में प्राकृतिक नागरिक के रूप में भारत रत्न पाने वाली पहली गैर-भारतीय प्राप्तकर्ता बनीं। इसी तरह वर्ष 1987 और 1990 में अब्दुल गफ्फार खान और नेल्सन मंडेला भारत रत्न पाने वाले दूसरे और तीसरे गैर-भारतीय बने।
अब्दुल गफ्फार खान एक स्वतंत्रता कार्यकर्ता थे, अब पाकिस्तान के नागरिक हैं और नेल्सन मंडेला रंगभेद विरोधी आंदोलन के नेता थे, वे दक्षिण अफ्रीका के नागरिक हैं।

क्या भारत रत्न पुरस्कार मरणोपरांत दिया जा सकता है?
मूलतः यह पुरस्कार मरणोपरान्त दिये जाने का प्रावधान नहीं था। लेकिन बाद में इस क़ानून को जनवरी 1966 में संशोधित किया गया जब भारत के पूर्व प्रधान मंत्री लाल बहादुर शास्त्री का नाम इस पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था। भारत के पूर्व प्रधान मंत्री लाल बहादुर शास्त्री 1966 में मरणोपरांत सम्मानित होने वाले पहले प्राप्तकर्ता बने। आज तक भारत रत्न के 18 मरणोपरांत प्राप्तकर्ता हैं।
क्या भारत रत्न पुरस्कार कभी बंद हुआ है?
जी हाँ यह सत्य है, भारत रत्न और साथ में अन्य व्यक्तिगत नागरिक सम्मान को भारत के इतिहास में अब तक दो बार निलंबित किया गया हैं।
सबसे पहले इसे जुलाई 1977 से जनवरी 1980 तक निलंबित किया गया था और इस राष्ट्रीय सम्मान के बंद होने का कारण राष्ट्रीय सरकार में बदलाव था। मार्च 1977 से जुलाई 1979 तक मोरारजी देसाई प्रधान मंत्री बने और उसके बाद चौधरी चरण सिंह जुलाई 1979 से जनवरी 1980 तक प्रधान मंत्री के रूप में चुने गए। जनवरी 1980 में श्रीमती इंदिरा गांधी ने भारत के प्रधान मंत्री का पद फिर से संभाला और सभी नागरिक पुरस्कार को फिर से सक्रिय किया गया।
और दूसरी बार इसे अगस्त 1992 से दिसंबर 1995 तक निलंबित कर दिया गया था। बंद करने के पीछे कारण कई जनहित याचिकाएं थीं जिन्होंने पुरस्कारों की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी थी। निलंबन और पुन: सक्रिय करने की घटना उस काल में हुई थी जब पी. वी. नरसिम्हा राव भारत के प्रधान मंत्री थे।
सुभाष चंद्र बोस का पुरस्कार लेने से इनकार क्यों किया गया?
वर्ष 1992 में, जब पी. वी. नरसिम्हा राव भारत के प्रधान मंत्री थे और सरकार ने सुभाष चंद्र बोस को मरणोपरांत यह पुरस्कार देने का निर्णय लिया। उस निर्णय को उन लोगों ने चुनौती दी थी जिन्होंने सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु के तथ्य को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। इस विरोध में उनके विस्तारित परिवार के कुछ सदस्य भी शामिल थे.
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