26 जनवरी और 15 अगस्त को झंडा फहराने में क्या अंतर है?

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26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) और 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) के राष्ट्रीय समारोह के दिन झंडा फहराने में अंतर होता है। इन महत्वपूर्ण राष्ट्रीय दिवसों पर झंडा फहराना के इस अंतर को बहुत से छात्र नहीं जानते हैं । नीचे दिए गए लेख में हम इस अंतर के बारे में जानेंगे और यह भी जानेंगे कि इस वर्ष का स्वतंत्रता दिवस अन्य वर्षों से कैसे भिन्न रहा और कई अन्य जानकारियां जो एक छात्र को पता होनी ही चाहिए, हम यहां चर्चा करेंगे इसलिए ब्लॉग के संपर्क में रहें।

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आम आदमी की दृष्टि से झंडा फहराना सिर्फ झंडा फहराना है। उन्होंने कभी नहीं देखा कि झंडा फहराने में कोई अंतर है या नहीं, मतलब झंडा फहराने के चरण में कोई अंतर है या नहीं। यहां हम भारतीय ध्वज के ध्वजारोहण के बारे में चर्चा कर रहे हैं। यहां हम देश के दो राष्ट्रीय समारोह (स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस) पर झंडा फहराने की बात कर रहे हैं, बस ब्लॉग के साथ बने रहें और अपने ज्ञान को बढ़ाते रहें और प्रोत्साहित करने के लिए कमेंट भी करते रहें।

झंडा क्या है?

एक ध्वज एक प्रतीक है जो एक विशिष्ट संस्था, संगठन, राज्य या राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करता है और उसका प्रतीक होता है।

क्या ध्वज के गठन के पीछे कोई इतिहास पाया गया है?

अगर इतिहास की ओर देखें तो हम पाते है कि लगभग 5000 से अधिक वर्षों के इतिहास में झंडे का उपयोग आम प्रतीकों के रूप में किया जाता रहता है, जिसमे 3000 ईसा पूर्व का एक धातु का बना ईरानी ध्वज और मिस्र के मकबरे पर की गई नक्काशी में ध्वज का प्रतिबिंब पाया जाता है ।

झंडों की रूपरेखा व बनावट

झंडों की रूपरेखा व बनावट अलग-अलग देशों ,राज्यों, संगठन और संस्थाओं का अलग-अलग होता है झंडों के भीतर का रंग अलग-अलग देशों ,राज्यों, संगठन और संस्थाओं का अलग-अलग होता है क्योकि झंडों में प्रस्तुत रंग गहरे अर्थ का प्रतिनिधित्व करते हैं।

झंडे को प्रतीकात्मक भाषा के रूप में भी माना जा सकता है

हां, ध्वज को एक प्रतीकात्मक भाषा के रूप में भी माना जा सकता है क्योंकि ध्वज पर मौजूद चिन्ह किसी विशिष्ट राज्य, देश, संगठन के नाम का प्रतिनिधित्व करते हैं। उदाहरण के लिए, जब हम झंडे पर एक बड़े प्लस (+)का चिन्ह देखते हैं, तो हमारा दिमाग यह बता देता है कि यहां रेडक्रॉस का एक कार्यालय है, चाहे वह लिखा हो या नहीं, इसी तरह जब हम झंडे पर पांच छल्ले (Rings) देखते हैं तो हम पहचान जाते हैं कि यहां कोई ओलंपिक की प्रतियोगिता चल रही है। अगर हमें कहीं काला झंडा मिला तो हमें पता चला कि कुछ विरोध चल रहा है। इसी कारण हम कह सकते है कि झंडा किसी भी राज्य, देश या संगठन के नाम का प्रतिनिधित्व करता है। तो झंडा एक प्रतीकात्मक भाषा है।

झंडे की आवश्यकता क्यों पड़ी ?

अब एक प्रश्न मन में आता है कि “झंडे की आवश्यकता क्यों पड़ी होगी” ? इतिहास गवाह है कि मूल रूप से झंडे का इस्तेमाल ज्यादातर युद्ध के मैदान में किया जाता था, क्योंकि कुछ हद तक युद्ध क्षेत्र में झंडे को नेतृत्व के प्रतीक चिन्ह के रूप में किया जाता था ताकि दोस्त या दुश्मन की पहचान की जा सके और युद्ध के अंत में अपना स्वामित्व घोषित कर सके ।

झंडे कितने प्रकार के हो सकते हैं?

मुख्य रूप से तीन प्रकार के झंडे हो सकते हैं।
01) राष्ट्रीय ध्वज
02) राज्य का झंडा,
03) एजेंसियों या संगठन के झंडे।
अगर हम भारत के बारे में बात करें तो यहां राज्य का कोई अलग राज्य ध्वज नहीं है पूरे देश में केवल एक ध्वज है और वह हमारा राष्ट्रीय ध्वज है। लेकिन भारत में हमारे सैन्य संगठनों के लिए अलग झंडे हैं जो उनके अस्तित्व को दर्शाता है।

दुनिया का सबसे पुराना और पहला झंडा कौन सा है?

डेनमार्क एक ऐसा देश है जिसके पास दुनिया का सबसे पुराना झंडा है। डेनिश ध्वज, जिसे “डेनबोर्ग” भी कहा जाता है। यह 13 वीं शताब्दी ईस्वी पूर्व में अस्तित्व में आया था। ऐसा माना जाता है कि यह 15 जून, 1219 से अस्तित्व में है, हालांकि इसे आधिकारिक तौर पर 1625 में राष्ट्रीय ध्वज के रूप में मान्यता दी गई । डेनमार्क का राष्ट्रीय ध्वज स्वयं में
सबसे पुराना और लगातार इस्तेमाल किया जाने वाला राष्ट्रीय ध्वज है। इस राष्ट्रीय ध्वज ने अपना नाम गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रेकॉर्ड्स में अंकित करने का गौरव प्राप्त किया है ।

किसी देश के लिए ध्वज का क्या महत्व होता है ?

एक विशिष्ट राष्ट्रीय ध्वज का डिज़ाइन और रंग उसके देश का प्रतीक है और विभिन्न तरीकों से अपने मूल्यों, विश्वासों और इतिहास की पहचान भी करता है। प्रत्येक राष्ट्रीय ध्वज दुनिया भर में अपने देश और राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करता है और एक विशिष्ट संदेश भी देता है।

क्या दुनिया में किसी देश का त्रिकोणीय आकार का झंडा है ?

आधुनिक दुनिया में केवल नेपाल ही एकमात्र देश ऐसा है जिसके पास आयताकार राष्ट्रीय ध्वज नहीं है या कह सकते है कि अकेला देश है जिसका राष्ट्रीय धवज तिकोना है।

भारतीय राष्ट्रीय ध्वज की विशेषताएं

भारत का राष्ट्रीय ध्वज आयताकार ध्वज है जो तीन समान पट्टियों में विभाजित है। भारतीय ध्वज की सबसे ऊपरी पट्टी केसरिया रंग की है। यह देश की ताकत और साहस को दर्शाता है। बीच की पट्टी सफेद रंग की है। यह धर्म चक्र के साथ शांति और सच्चाई का संकेत देता है। नीचे की पट्टी हरे रंग की है, जो भूमि की उर्वरता, वृद्धि और शुभता का संकेत देती है। इसे ” तिरंगा ” के नाम से भी जाना जाता है।

भारतीय ध्वज का आविष्कार किसने किया ?

भारत के ध्वज का डिज़ाइन जो पहली बार 1921 में अखिल भारतीय कांग्रेस के नेता पिंगले वेंकय्या (Pingali Venkayya) द्वारा महात्मा गांधी को प्रस्तुत किया गया था। इसमें दो प्रमुख धर्मों से जुड़े रंगो को शामिल किया गया था, लाल रंग हिंदुओं के लिए और हरा रंग मुसलमानों के लिए ।

भारतीय ध्वज के विकास की कहानी

जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है कि 1921 में पिंगली (या पिंगले) वेंकय्या नाम के एक छात्र ने गांधी जी को एक ध्वज डिजाइन करके प्रस्तुत किया जिसमें दो प्रमुख धर्मों से जुड़े रंग शामिल थे, हिंदुओं के लिए लाल और मुसलमानों के लिए हरा। इस ध्वज के डिजाइन में ध्वज को केंद्र से क्षैतिज रूप से विभाजित किया गया था, लाला हंस राज सोंधी ने ध्वज के डिजाइन में पारंपरिक चरखा को जोड़ने का सुझाव दिया, जिसका उद्देश्य स्थानीय रेशों से अपने स्वयं के कपड़े बनाकर भारतीयों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए गांधी जी के धर्मयुद्ध से जुड़ा था। गांधी जी ने भारत के अन्य धार्मिक समुदायों के लिए केंद्र में एक सफेद पट्टी जोड़कर ध्वज के डिजाइन को संशोधित किया और चरखा के लिए स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाली पृष्ठभूमि भी प्रदान की।

धीरे-धीरे कांग्रेस पार्टी का यह झंडा भारत के लिए राष्ट्रीयता के प्रतिक के साथ जुड़ गया और इस ध्वज के डिजाइन में लाल रंग के बजाय गहरे भगवा रंग के बदलाओ के साथ उपयोग को मंजूरी दी गई और इस ध्वज के डिजाइन को आधिकारिक तौर पर अगस्त 1931 में पार्टी की वार्षिक बैठक में मान्यता दे दी गई । मूल प्रस्ताव के सांप्रदायिकता दृष्टिकोण से बचने के लिए, केसरिया, सफेद और हरी धारियों की परिभाषा को भी संबोधित किया गया ।

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ब्रिटिश सरकार ने भारत को स्वतंत्रता प्रदान करने के लिए विचार करने पर सहमत हो गया। 22 जुलाई 1947 को आधिकारिक तौर पर भारतीय राष्ट्रीय ध्वज को फहराया गया । इसकी धारियां वही भगवा-सफ़ेद-हरे रंग की बनी रहीं, लेकिन चरखे को नीले धर्म चक्र (“कानून का पहिया”) से बदल दिया गया ।

स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस को झंडा फहराने में अंतर

यहां पर यह जानना महत्वपूर्ण है कि भारत मे दो राष्ट्रीय पर्वों पर ध्वजारोहण किया जाता है और यह राष्ट्रीय पर्व है स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस । स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को मनाया जाता है और इस दिन देश का प्रधानमंत्री लाल किले के प्राचीर पर ध्वजारोहण करते है और गणतंत्र दिवस 26 जनवरी को मनाया जाता है और इस दिन देश का राष्ट्रपति राजपथ पर ध्वजारोहण करते है, लेकिन हम यहां यह समझने आये है कि क्या दोनों राष्ट्रीय पर्व पर ध्वजारोहण में कोई अंतर होता है ? तो आइए समझते है ।

भारत के स्वतंत्रता दिवस के पर्व पर झंडा जो की देश के प्रधानमंत्री द्वारा लाल किले के प्राचीर पर फहराया जाता है, उस दिन ध्वज को खंभे के बीच में कहीं मोड़कर रखा जाता है और प्रधानमंत्री द्वारा पहले ध्वज को ऊपर की ओर खींचा जाता है और फिर फहराया जाता है जिसका अर्थ है या यह संकेत देता है कि आज के दिन हमारे देश को पूर्ण स्वाधीनता प्राप्त हुई थी इसी लिए पहले ध्वज को ऊपर की ओर खींचा जाता है और फिर फहराया जाता है।

भारत का दूसरा राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस है जो कि सार्वजनिक रूप से 26 जनवरी को मनाया जाता है। इस दिन, भारत के राष्ट्रपति भारत की सैन्य शक्ति और सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करने वाली परेड की अध्यक्षता करने से पहले राजपथ पर झंडा फहराते हैं। इस दिन का राष्ट्रीय ध्वज को फहराने का तरीका स्वतंत्रता दिवस से कुछ अलग होता है इस दिन का राष्ट्रीय ध्वज को खंभे के ऊपरी सिरे पर बांधा जाता है और सिर्फ राष्ट्रपति द्वारा केवल उसे फहराया जाता है। गणतंत्र दिवस को स्वतंत्रता दिवस के पर्व की तरह ध्वज को पहले खींच कर ऊपर नहीं किया जाता बल्कि ध्वज पहले से ही खंभे के ऊपरी सिरे पर बंधा रहता है. जो यह दर्शाता है कि भारत एक स्वतंत्र राष्ट्र में से एक है।

सारांश

दोनों राष्ट्रीय समारोहों में ध्वजारोहण में बहुत मामूली अंतर दिखाई देता है जिस अंतर को शायद एक आम व्यक्ति महसूस भी नही कर पता लेकिन इस मामूली से अंतर का महत्व बहुत बड़ा हो सकता है यह शायद ही ज्ञात होगा। स्वतंत्रता दिवस के पर्व पर झंडा फहराना औपनिवेशिक वर्चस्व से मुक्त एक नए राष्ट्र के उदय का प्रतीक है। जबकि गणतंत्र दिवस पर, झंडा पहले से ही झंडे के ऊपर होता है और यह दर्शाता है कि यह एक स्वतंत्र राष्ट्र में से एक है। एक स्वतंत्र राष्ट्र का झंडा गणतंत्र दिवस जैसे महत्वपूर्ण दिन पर आधा झुका नहीं रह सकता। यह दो कृत्यों के प्रतीकवाद में बड़ा अंतर होता है।

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